भूमि (भूम्या) आंवला: लिवर , गुर्दे की पथरी और पाचन के लिए एक चमत्कारी जड़ी बूटी

भूमि (भूम्या) आंवला: लिवर , गुर्दे की पथरी और पाचन के लिए एक चमत्कारी जड़ी बूटी 

 परिचय

भूम्या आंवला (भूम्यामलकी) एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग प्राचीन काल से लिवर की सुरक्षा, गुर्दे की पथरी के उपचार और बेहतर पाचन के लिए किया जाता रहा है। इसका नाम "भूम्या आंवला" इसलिए रखा गया है क्योंकि यह पौधा ज़मीन के पास (भूमि) उगता है और इसके फल छोटे आंवले जैसे दिखते हैं।

 वैज्ञानिक जानकारी

विवरण

  • वैज्ञानिक नाम: फिलैंथस निरुरी
  • कुल: यूफोरबियासी
  • अन्य नाम: भुइयावाला, तमालकी, कीझनेली, स्टोन ब्रेकर
  • प्रकृति: वार्षिक औषधीय पौधा

 भूमि आंवला की पहचान

  • यह पौधा लगभग 20 से 30 सेंटीमीटर ऊँचा हो सकता है।
  • इसके पत्ते छोटे, हरे और आंवले के पत्तों से मिलते जुलते होते हैं।
  • पत्तियों के नीचे छोटे हरे दाने लगते हैं, जो आंवले जैसे दिखते हैं।
  • यह बरसात के मौसम में आसानी से उग जाता है।

 भूमि आंवला के औषधीय गुण

  • भूमि आंवला में एंटीऑक्सीडेंट,एंटीवायरल, हेपेटोप्रोटेक्टिव, और मूत्रवर्धक (DIURETIC)गुण होते हैं।

 1. लिवर की सुरक्षा

  • भूमि आंवला लिवर को मजबूत बनाता है और पीलिया, हेपेटाइटिस और फैटी लिवर जैसी बीमारियों के लिए फायदेमंद है।
  • यह लिवर टॉनिक के रूप में कार्य करता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।

 2. गुर्दे की पथरी और मूत्र रोगों के लिए उपयोगी

  •  भूमि आंवला गुर्दे की पथरी को तोड़ने और बाहर निकालने में मदद करता है।
  •  यह मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूटीआई) और सीने की जलन को भी कम करता है।

 3. पाचन तंत्र को मजबूत करता है

  •  यह अपच, गैस, कब्ज और भूख लगने के लिए फायदेमंद है।
  •  यह पित्त स्राव को नियंत्रित करता है और पाचन में सुधार करता है।

  4. त्वचा रोगों से राहत

  •  भूमि आंवला रक्त को शुद्ध करता है, जिससे त्वचा पर फोड़े-फुंसी और चकत्ते दूर होते हैं।

  5. शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण

 नियमित सेवन से रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

 यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक है।

  6.भूमि आंवला का सेवन कैसे करें

रूप मात्रा विधि

  • रस: 10-15 मिलीलीटर सुबह खाली पेट या शाम को।
  • चूर्ण: 2-3 ग्राम गुनगुने पानी या शहद के साथ।
  • काढ़ा: 30-50 मिलीलीटर दिन में 1-2 बार।

 ⚠️ सावधानी:

गर्भवती महिलाओं या गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए।

  भूमि आंवला कैसे लगाएँ

 1. स्थान
  •  इसे धूप वाली जगह पर लगाएँ जहाँ पानी जमा हो।
 2. मिट्टी
  •  हल्की दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है।
 3. सिंचाई
  •  मिट्टी को थोड़ा नम रखें, लेकिन जलभराव से बचें।
 4. बीज बोना
  •  मार्च और जून के बीच बीज बोना सबसे अच्छा होता है।
  •  पौधा 2-3 महीनों में पक जाता है।

 🌼 भूमि आंवला के प्रमुख लाभ (संक्षिप्त सारांश)

रोग/समस्याएँ: भूमि आंवला के लाभ

यकृत रोग: यकृत को स्वस्थ रखता है

गुर्दे की पथरी: पथरी को घोलने में मदद करता है

पाचन समस्याएँ: अपच और कब्ज से राहत देता है

त्वचा रोग: रक्त शुद्ध करता है और चकत्ते को शांत करता है

मधुमेह: रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है

🌿 निष्कर्ष

 भूमि आंवला एक सस्ता और प्रभावी प्राकृतिक रूप से प्राप्त औषधीय पौधा है, जो यकृत की सुरक्षा, गुर्दे की पथरी के उपचार, बेहतर पाचन और रक्त शोधन के लिए अत्यंत उपयोगी है। नियमित और उचित सेवन कई बीमारियों से बचाव में मदद करता है।

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